छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम के केस में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दुर्घटना दावों में मुआवजा तय करते समय केवल आधार कार्ड में दर्ज उम्र को ही आयु का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता।
बीमा कंपनियां शुरू में बड़े-बड़े और लुभावने आफर देकर ग्राहक बनाती हैं फिर अगर कोई हादसा हो जाए तो उपभोक्ता के परिजनों को क्लेम के लिए चक्कर लगवाती हैं। या फिर मुआवजा राशि देने से मुकर जाती हैं। इससे पीड़ित अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं।














